
यूटिलिटी डेस्क. फरवरी में अब तक निफ्टी 50 की कंपनियों का मार्केट कैप 16 लाख करोड़ रुपए कम हुआ। वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। देश-दुनिया में इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान कोरोना वायरस के कारण महामारी की आशंका में हुआ है। निवेशक और ट्रेडर्स इस डर में जमकर बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका की पांच बड़ी कंपनियों जिन्हें एफएएमजीए भी कहा जाता है का मार्केट कैप 10 से 15 फीसदी घट गया है। इनमें फेसबुक (-9.7%), एपल (-12.6%), माइक्रोसॉफ्ट (-11.4%), गूगल (-11.4%) और अमेजन (-10.1%) शामिल हैं।
इस घटनाक्रम को ऐसे समझिए अगर एक एसेट क्लास की वैल्यू गिरती तो इसका असर अन्य एसेट क्लास पर भी पड़ता है। फिर वे एक के बाद एक लुढ़कते जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 11.8%. डॉउ जोंस में 11.1%, एसएंडपी 500 में 10.8%, नैसडैक में 10.6% और शंघाई एक्सचेंज में 1.6% की गिरावट आई है। तेल और इंडेक्स में हुए नुकसान की भरपाई के लिए निवेशक इक्विटी की बिकवाली कर रहे हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इक्विटी वेल्थ में कमी आना घटनाप्रधान है न कि बिजनेस या कंपनी के बुनियादी ढांचे में कमी आने की वजह से। मेटल, पॉलीमर और अन्य कमोडिटी में कमजोरी डिमांड में कमी आने की आशंका से है। इस अफरातफरी की स्थिति में ट्रेडर गोल्ड, डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी आदि में पैसे लगाने लगे।
अच्छी खबर यह है कि चीन में अब नए मामले कम हो रहे हैं। साथ ही मार्च-अप्रैल में गर्मी बढ़ने से वायरस पर काबू पाना पहले की तुलना में आसान होगा।
एक और अच्छी खबर यह है कि भारतीय कंपनियां और उनका प्रोडक्शन अब तक ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है। जो थोड़ा-बहुत असर पड़ा है वह भी मार्च अंत तक दूर हो जाने की उम्मीद है। कच्चे तेल और पॉलीमर की कीमतें घटने का भारतीय इंडस्ट्री को फायदा मिला है। अभी हम यह अनुमान नहीं लगा सकते है कि संकट कब दूर होगा, लेकिन इतना कहा जा सकता है कि इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह समय संयम और विश्वास बनाए रखने का है।
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