जीएसटी कटौती से आकर्षक बना हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, इसमें हैं निवेश के बेहतर मौके

यूटिलिटी डेस्क. देश के होटल सेक्टर के लिए 2019-20 कुछ खास नहीं बताया जा रहा है। वित्त वर्ष की शुरुआत में औसत रूम रेट में इजाफा हुआ था, लेकिन यह लंबे समय तक बरकरार नहीं रहा। जेट एयरवेज की सेवाएं बंद होने और आम चुनाव का इस सेक्टर पर नकारात्मक असर हुआ। आर्थिक सुस्ती के कारण कॉरपोरेट डिमांड भी घटी। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में स्थिति में सुधार दिख रहा है। सिद्धार्थ खेमका हेड-रिटेल रिसर्च, मोतीलाल ओस्वाल बताते हैं किदिसंबर तिमाही में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का एग्रीगेट रेवेन्यू सालाना आधार पर 5% की दर से बढ़ा। कुछ महीने पहले हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए जीएसटी रेट में कटौती की गई। इससे रिटेल डिमांड में सुधार आया। कॉरपोरेट और एसएमई की ओर से डिमांड घटी लेकिन, रिटेल सेगमेंट से डिमांड बढ़ने के कारण स्थिति ठीक रही है। मौजूदा समय में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के लिए मिड कैप सेगमेंट से हमारी टॉप पिक इंडियन होटल्स है। वहीं, स्मॉल कैप में हमारी टॉप पिक लेमनट्री है।


लेमनट्री का तिमाही रेवेन्यू 39 फीसदी बढ़ा
दिसंबर तिमाही में लेमनट्री का रेवेन्यू 39 फीसदी बढ़ा। चालेट का रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़ा। ईआईएच का रेवेन्यू 4 फीसदी घटा। इंडस्ट्री डिमांड 4.7% बढ़ी और सप्लाई में 2.5% का इजाफा हुआ। चुनाव के बाद लगातार दूसरी तिमाही में डिमांड-सप्लाई की स्थिति सकारात्मक रही है।



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प्रतीकात्मक फोटो


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