
नई दिल्ली. कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार और समाज की ओर से तमाम कोशिशें की जा रही है। इसमें सबसे कारगर कोशिश सोशल डिस्टेंसिंग को माना जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग यानी दूसरों से दूर रहना और जितना हो सके अपने घर पर रहना। इसके मद्देनजर दुनियाभर की कंपनियों के लाखों-करोड़ों कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। हालांकि, घर से काम करने वाले कई कर्मचारी इसे फायदेमंद भी बताते हैं। जैसे कि सुबह उठकर ऑफिस के लिए तैयार होने का झंझट नहीं होता है। ना ही किसी प्रकार की ड्रेस कोड की समस्या होती है। कोई अलार्म की घंटी नहीं बजती, काफी फ्लेक्सिबल शेड्यूल होता है जहां घर में समय देने के साथ ही ऑफिस का काम भी चलता रहता है। इसमें कोई शक नहीं है वर्तमान में वर्क फ्रॉम होम का चलन लोकप्रिय है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 4.3 मिलियन कर्मचारी (वर्कफोर्स का 3.2%) समय घर से ही काम करते हैं। इसके बावजूद इसका एक अलग पहलू भी है। भले आपको सुबह उठकर बिना किसी ड्रेस कोड के साथ तैयार होकर काम शुरू करना आकर्षक लग रहा हो, लेकिन पूरे दिन किसी कमरे में बैठकर काम करना आपके हेल्थ के लिए कहीं से भी आकर्षक नहीं है। जानिए कैसे घर से काम करना नुकसानदायक हो सकता है।
निजी और पेशेवर जिंदगी को मैनेज करना मुश्किल?
कई लोग अपनी पेशेवर और निजी जिंदगी को अलग-अलग रखना चाहते हैं। हालांकि वर्क फ्रॉम होम में यह संभव नहीं है। इसके अलावा संभव है कि आपको अपने छुट्टी वाले दिन भी काम करना पड़े। ऑफिस में आप 8-9 घंटे काम करते हैं जिसमें कई तरह के एक्टिविटीज के साथ आपको गुजरना पड़ता है लेकिन घर में आप किसी कोने में ऑफिस के काम में बिजी रहते हैं, साथ ही घर के काम पर भी ध्यान रहता है। ऐसे में आप दोनों को मैनेज करना होगा वरना आपकी परेशानी बढ़ जाती है। खासकर महिलाओं के लिए घर से काम करना काफी चैलेंजिंग हो गया है। एक प्राइवेट कंपनी की एचआर श्रेया वर्मा बताती है कि उन्हें घर के काम के साथ ऑफिस का काम भी टाइमली मैनेज करना पड़ रहा है। ऑफिस में काम करने की एक शिफ्ट होती है, लेकिन जब से वह घर में काम कर रही है तब से वह शिफ्ट से ज्यादा काम कर रही है। 9 घंटे की जगह वे अब 11-12 घंटे काम करती है। श्रेया के मुताबिक, घर से काम करने में हर समय खुद को प्रुव करना पड़ता है कि आप काम कर रहे हो, एक्टिव हो। वहीं, गुरूग्राम स्थित एक आईटी कंपनी में काम करने वाले अनुराग मिश्रा का कहना है कि वर्क फ्रॉम होम उनके लिए मुसीबत हो गई है। उनका वर्क लोड पहले से ज्यादा बढ़ गया है, जिससे कि मानसिक तौर पर प्रेशर काफी बढ़ा है। इन दिनों उन्हें 12 से 15 घंटे काम करना पड़ रहा है। वे कहते हैं, घर से काम करने के दौरान हर समय ऑनलाइन रहना पड़ता है, कभी वीडियो कांफ्रेस पर तो कभी फोन पर को-ऑर्डिनेट करना पड़ता है। इस बीच बच्चों और परिवार के के साथ ज्यादा समय गुजार नहीं पाते हैं।
सोशल लाइफ खत्म होने का डर?
ऑफिस में 8 घंटे काम के दौरान अलग-अलग लोगों से आपका मिलना होता है, आप अपने ऑफिस के दोस्तों के साथ चाय पर चर्चा करते हैं। यह सब आप वर्क फ्रॉम होम के दौरान नहीं कर पाते हैं। घर में आप चारदीवारी के बीच सिमट कर रह जाते हैं, परिवार और ऑफिस के काम के बीच आप अपने आपको, अपने दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं इससे सोशल लाइफ खत्म होने का डर रहता है।प्रेरणा के साथ कठिनाई अगर आप घर से काम करने को पसंद करते हैं यानि कहीं न कहीं आपने अपने कंफर्ट को चुन रहे हैं जहां आप आराम से काम करना चाहते हैं। हालांकि इस दौरान आप मोटिवेशन को अलविदा कह रहे होते हैं जो कि ऑफिस में काम करने के दौरान ही मिलता है। क्योंकि ऑफिस जाने के दौरान आप सुबह जल्दी उठने की कोशिश करते हैं। रात में समय से डिनर करके सो जाते हैं। ऑफिस के लिए आप कपड़े तैयार करके रखते हैं। इस अनुशासन का पालन आप घर में पायजामा पहन कर काम करने के दौरान नहीं कर पाते हैं।
टीमवर्क की दिक्कत
वर्क फार्म कर रहे लोगों से बातचीत से पता चला है कि घर से काम करने पर टीमवर्क के साथ काम करने में दिक्कत आ रही हैं। काम के प्रति क्रिएविटी सोच में कमी आई है। आॅफिस में जब आप अपने सहकर्मी से बातचीत करते हैं या किसी विषय पर डिस्कशन करते हैं तो ज्यादा अच्छा आइडिया उभर कर आता है जो कि वर्क फार्म होम में संभव नहीं है। इसके साथ ही घर पर काम करने के दौरान टीवी के शोर, बच्चों की शैतानियां और घर के काम आपका ध्यान भटका सकते हैं। इस वजह से आप अपने काम को पूरी लगन के साथ नहीं कर पाते हैं। गूगल हैंगआउट पर सिर्फ जरूरी की बातें ही होती है। आॅफिस की तरह किसी विषय पर घंटों चर्चा नहीं किया जा सकता है। हैंगआउट पर एक और समस्या जो कि इन दिनों देखा जा रहा है कि हर कर्मचारी एक साथ ऑनलइन मौजूद नहीं रह पाते हैं शायद इंटरनेट नेटवर्क की वजह से या फिर अन्य कारण जिस वजह से टीमवर्क के साथ काम नहीं हो रहा है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, जो व्यक्ति को वर्किंग स्पेस में अपने सहकर्मी के साथ काम कर रहे हैं वे ज्यादा अच्छे से काम कर पाते हैं। इतना ही नहीं वे ज्यादा क्रिएटिव-इनोवेटिव और खुश और स्वस्थ्य होते हैं।
जानिए, हेल्थ एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
दिल्ली के सरकारी हाॅस्पिटल लोक नायक जय प्रकाशन नारायण होस्पिटल (LNGP) के सीनियर डाॅक्टर रक्षित गर्ग मनी भास्कर से बातचीत में बताते हैं कि वर्क फार्म होम की वजह से काम का अत्यधिक प्रेशर बढ़ गया है। खाने-पीने से लेकर हर चीज में रूटीन बिगड़ गया है जिससे कि कर्मचारियों के स्ट्रेस लेवल हाई हो गया है। डाॅ रक्षित बताते हैं, हमारे पास हर दिन पांच से छह ऐसे केस आते हैं जो घर से काम करने की वजह से सरसर्द और आंखों की दर्द की समस्या बताते हैं। वहीं, सफदरजंग के डाॅक्टर रीना मित्तल के मुताबिक, इन दिनों लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं ऐसे में उन्होंने कहा कि ऐसे लोग रूटीन के अनुसार काम करें जहां वे घर का काम, ऑफिस वर्क और साथ में हेल्थ पर भी ध्यान दे सकें। डॉक्टरों की मानें तो स्वस्थ रहने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। अगर आपके इलाके में पूरी तरह लॉकडाउन हो गया है या आपने खुद को आइसोलेशन में रखा है, तो घर से बाहर न निकलें। ऐसे में घर पर ही थोड़ा बहुत एक्सरसाइज करने से खाना पचेगा और हड्डियां स्वस्थ रहेंगी। इससे शरीर के दर्द की समस्या भी दूर होगी।
वर्क फ्रार्म होम के दौरान इन बातों का रखें ध्यान-
- ध्यान रहे कि काम करते समय शोरगुल न हो जिससे कि आप अपने काम पर ध्यान दे सकें, क्योंकि बच्चों के भी स्कूल बंद हैं, तो इस बात का जरूर ख्याल रखें कि किस समय कौन बच्चों पर ध्यान देगा। जब आप काम कर रहे हैं तो कौन बच्चों की देखभाल करेगा? यदि आपका जीवनसाथी भी 'वर्क फ्रॉम होम' है तो समय स्लॉट और बच्चों से संबंधित कार्यों को साझा करें, वहीं डोरबेल जैसी अन्य गड़बड़ियों के लिए दिनचर्या और नियम व्यवस्थित करें।
- मानसिक संतुलन के लिए ब्रेक जरूर लें। ऑफिस में आप अपने सहकर्मी के साथ चाय या कॉफी के लिए जरूर जाते हैं, तो घर में इसके बजाय आप थोड़ी देर मामूली काम या बस अपनी सीट से उठने और थोड़ा खड़े होने के लिए ब्रेक ले सकते हैं। अपना पूरा फोकस अपने काम में रखें। मोबाइल में सिर्फ अपने ऑफिस संबंधित अपडेट के लिए ही मोबाइल का इस्तेमाल करें।
- वर्क-फ्रॉम-होम जॉब्स में आप सुविधा के अनुसार काम कर पाती हैं। लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं काम के लिए एक तय टाइम शेड्यूल जरूर बनाएं। टास्क के हिसाब से समय तय करें, फिर चाहे वह पर्सनल काम हो या ऑफिशियल। वर्कफ्रॉम-होम जॉब होने के बावजूद अपने काम के घंटे तय कर लेने से आप ज्यादा व्यवस्थित ढंग से काम कर पाएंगी।
- परफेक्ट वर्क-लाइफ बैलेंस तभी होगा जब आप खुद के लिए भी समय निकालेंगी। अगर आप होममेकर या मां हैं और घर से काम भी करती हैं तो आपको घर के कामों, ऑफिस के कामों, बच्चों, परिवार और अन्य सामाजिक आयोजनों आदि के बीच अपना समय बांटना पड़ता है। इस सबके बीच महिलाएं खुद को समय देना भूल जाती हैं जिससे शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए आप घर से काम कर रही हैं तो भी अपने लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे तक का समय जरूर निकालें। इसमें आप कुछ भी कर सकती हैं। एक्सरसाइज, डांस, म्यूजिक सुनना, वॉक पर जाना, टीवी देखना आदि।
- एक्सरसाइज जरूर करें, बैलेंस डाइट लें और रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं। ब्रेक लेकर रिलेक्स करें। बिना अच्छी सेहत, वर्क और लाइफ का बैलेंस बनाना नामुमकिन है।
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